तुरही की आवाज से हुआ था प्रथम वैशाली महोत्सव का शानदार आगाज

अनिलकुमारसिंह,वैशाली:

31मार्च1945कीसुबह8:00बजेवैशालीकेइतिहासमेंएकनयाअध्यायजुड़गयाजबयहांकेऐतिहासिकराजाविशालकेगढ़केखंडहरोंपरस्थानीयतुरहीवादकोंकेद्वाराबजाईगईतुरहीकीआवाजकेसाथप्रथमवैशालीमहोत्सवकाआगाजहुआथा।पटनाहाईकोर्टकेन्यायमूर्तिभुवनेश्वरप्रसादसिंह,जोबादमेंसुप्रीमकोर्टमेंमुख्यन्यायाधीशबनेथे,कीउपस्थितिमेंशुरूहुआयहमहोत्सवआजवैशालीहीनहीं,बल्किपूरेराज्यकीपहचानबनचुकाहै।इसबारअप्रैलकेप्रथमसप्ताहमेंआयोजितहोनेवालेवैशालीमहोत्सवकोलेकरडीएमकीअध्यक्षतमेंहाजीपुरमेंबैठकहोचुकीहै।अभिषेकपुष्किणकीउड़ाही,उसमेंजलभरावआदिकोलेकरपदाधिकारियोंकोकईनिर्देशदिएगएहैं।आनेवालेदिनोंमेंऔरकईबैठकेंहोंगी।

21जुलाई1944कोहाजीपुरकेतत्कालीनअनुमंडलपदाधिकारीजगदीशचंद्रमाथुरकीपरिकल्पनासाकारहुई।इसकीनींव31दिसंबर1944कोउन्होंनेहाजीपुरकेसरस्वतीसदनमेंसंपन्नहुईबैठकमेंरखी,जिसमेंदीपनारायणसिंह,रामशंकरप्रसादसिंह,दिग्विजयनारायणसिंह,लक्ष्मीश्वरप्रसादशुक्ला,पंडितजयनंदनझा,रामस्वरूपबूबनाएवंजगन्नाथप्रसादसाहआदिशामिलहुएथे।इनलोगोंकीएककमेटीबनाईगई।कमेटीनेकाफीसोच-समझकेबादसुदूरग्रामीणइलाकेमेंजहांआवागमनकाभीकोईसाधननहींथा,बसाढ़केनामसेजानेवालीजगहपरवैशालीमहोत्सवआयोजितकरनेकानिर्णयलियाथा।कमेटीकेइसकार्यमेंस्थानीयलोगोंकाभरपूरदसहयोगमिलाथा।यहींसेबसाढ़कोवैशालीकेरूपमेंनईपहचानमिली।

वैशालीमेंस्वच्छताअभियानकीझलकप्रथमवैशालीमहोत्सवमेंहीदिखगईथी।तत्कालीनहेल्थकमिश्नरविन्देश्वरीप्रसादकीदेखरेखमेंवैशालीगांवमेंसफाईप्रतियोगिताआयोजितकीगईथी।समारोहकेपहलेदिनतत्कालीनविधायकरामेश्वरप्रसादसिंहकीअध्यक्षतामेंएकडिबेटहुआथा।वाद-विवादप्रतियोगिताशायदइसलिएकिप्राचीनवैशालीकीगणसभाओंमेंवाद-विवादसेहीअंतिमनिर्णयपरपहुंचाजाताथा।दोपहरबादएकभव्यकलाप्रदर्शनीलगाईगईथीजिसमेंयामिनीराय,उपेन्द्रमहारथी,अवनीनन्दनाथठाकुर,दिनेशबक्शी,सुधीरखास्तगीर,दामोदरप्रसादअंबष्ठजैसेकलाकारोंकीकृतियोंकोलोगोंनेदेखाथा।शामकोराजाविशालकेगढ़केखंडहरकेदक्षिणीपूर्वीकोणपरबनेमंचपरइतिहासकारडॉ.राधाकुमुदमुखर्जीकेसभापतित्वमेंमहोत्सवप्रारंभहुआथा।

प्रथमवैशालीमहोत्सवकेअवसरपरजगदीशचंद्रमाथुरनेउपस्थितलोगोंकोसम्बोधितकरतेहुएकहाथाकिवैशालीमहोत्सवकाउद्देश्यनकेवलएकप्राचीनसंस्कृतिकेध्वंसावशेषमेंजनरुचिकाआह्वानकरनाहै,जनतामेंजीवनकेउत्कर्षतथाभावनाकोपुन:जागृतकरनाभीहै।मनोरंजनप्रसादसिंहनेअपनीकविताकिसअतीतगौरवकीगाथाकवितूगानेआयाहै,मतकहक्या-क्याहुआइसवैशालीकेआंगनमेंकापाठकियाथा।

महोत्सवकेदूसरेदिनएककमेटीनेस्वचछगावोंकीजांचकीअैरन्यायमूर्तिभुवनेश्वरप्रसादसिंहकेसभापतित्वमेंएकसभाकाआयोजनकियागयाजिसमेंइतिहासकारप्रो.ओसीगांगुलीकेभाषणकेबादसफाईप्रतियोगितामेंअव्वलआएगांवकेमुखियाकोसम्मानितकियागया।उसीदिनवैशालीसंघभवनकीआधारशिलाडॉ.राधाकुमुदमुखर्जीकेद्वारारखीगई,जहांआजएकस्तम्भहैजिसेलोगमाथुरपिलरकेनामसेजानतेहैं।

दोपहरमेंसाहित्यकारजनार्दनझाकीअध्यक्षतामेंहिदीसाहित्यसम्मेलनकावार्षिकउत्सवमनायागया।रातमेंहुईबिहारप्रांतीयहिन्दीसाहित्यमंडलकेअधिवेशनमेंराष्ट्रकविदिनकरनेअपनीनवीनकविताकापाठकियाथा-ओभारतकीभूमिबन्दिनी,ओजंजीरोंवाली

तेरीहीकुक्षीफाड़करजन्मीथीवैशालीस्थानीयबिजलीसिंह,विग्गुरायएवंचतर्भुजसिंहकेलोकगीतोंनेजहांलोगोंकामनोरंजनकिया,वहींकपिलदेवमिश्र,जयदेवपाठककेद्वारासूरदास,तुलसीदासएवंपद्माकरकीकविताओंकापाठकियागया।रात्रिमेंसूर्यदेवनारायणश्रीवास्तवकीरचनावैशालीगौरवकाप्रस्तुतिकरणनवलकिशोरगौड़नेकियाथा।

इसअवसरपरग्रामीणोंकीभीएककमेटीबनीथीजिसमेकेदारप्रसादसिंह,ब्रह्मदेवसिंह,रामकैलाशसिंह,नन्दकिशोरप्रसादसिंहथे।उपेंद्रमहारथीकीदेखरेखमेंबांससेमंचसज्जाएवंगेटकानिर्माणकियागयाथा।

पहलामहोत्सव31मार्च1945को

दूसरामहोत्सव10अप्रैल1946रामनवमीको

तीसरामहोत्सव14अप्रैल1947चैतसंक्रांतिको

चौथामहोत्सवमहावीरजयंतीसेप्रारम्भहुआवैशालीमहोत्सवमेंदोशोभायात्राएंनिकालीजातीहैंवैशालीमहोत्सवमेंदोशोभायात्राएंनिकालीजातीहैं।सुबहमेंजैनसमाजकेलोगोंद्वारावामनपोखरसेजहांभगवानमहावीरकीमूर्तिकीपूजाअर्चनाहोतीहैऔरउसकेबादजुलूसकेरूपमेंनाचते-गातेश्रद्धालुभगवानकीजन्मभूमिवासोकुण्डतकजातेहैं।19अप्रैल1951सेयहपरंपराचलीआरहीहै।शामकोदूसरीशोभायात्रास्थानीयग्रामीणनिकालतेहैं।1962सेदूसरीशोभायात्राभीस्थाईपरम्पराबनगईहै।पुष्पकरिणीकेउत्तरीतटपरमुख्यअतिथिद्वारापूजाकरनेकेबादस्थानीयमछुआरेचैतागायनकेसाथसजीनावसेपोखरकेदक्षिणीभागमेंजातेहैं,जहांसेसजीबैलगाड़ीसेसभास्थलतकपहुंचनेपरमुख्यअतिथिकलशग्रहणकरस्थापितकरतेहैं।फिरविधिवतकार्यक्रमप्रारंभहोताहै।