संघर्ष व चुनौतियों से निखरकर सविता ने पाई मंजिल

मधेपुरा।संघर्षवचुनौतियांमानोसवितासिंहकेलिएजीवनकाहिस्सारहा।जबतीनसालकीथीतोमांचलबसी,लेकिनबड़ेभाईवकोसीकेचर्चितचिकित्सकत्रिवेणीसिंहकास्नेहवपिताकेबताएरास्तेनेहरकठिनचुनौतीकोसवितासेआसानीसेपारकिया।आजसवितासिंहकीसंस्कारबड़ीवजहहैकिसीमांचलकीचर्चितसमाजसेवीहै।पतिकिशोरसिंहकामर्सकालेजकेप्रोफेसरहैं।

सविताबतातीहैकिशादीकेबादपतिकावेतनइतनाज्यादानहींथाकिअपनेचारबच्चोंकोबेहतरशिक्षादेसके।कभी-कभीतोपतिकोछहमाहतकवेतननहींमिलताथा।घरकीमालीस्थितिकोदेखतेहुएसंकल्पलियाकिबच्चोंकेसाथ-साथखुदअच्छीशिक्षालेंगी।यहीकारणहैकिशादीकेबादस्नातककिया।उसकेबादहरपरिस्थितिमेंबच्चोंकोपढ़ाया।कुछदिनतोऐसालगाकिआर्थिकअभावमेंशायदहीबच्चोंकोअच्छीशिक्षादेपाएंगे,लेकिनकहतेहैंनइमानदारीपूर्वकमेहनतहोतोसबकुछमुमकीनहै।आजउसीमेहनतकानतीजाहैकिबड़ीबेटीश्वेतादिल्लीमेंप्रतिष्ठितयोगशिक्षिकाहै।दूसरीबेटीशिवानीकोसीकाजानापहचानानामहै।पुत्रअंबेशसिंहसफलआटोमोबाइलव्यवसायीहैं।सविताकहतीहैकिबच्चोंकोऊंचीशिक्षासबसेपहलेमां-बापउसकेबादपरिवारसेमिलतीहै।