स्मृति शेष: शौर्य चक्र विजेता की मां का निधन, दो बार कैंसर को हराया, तीसरी बार खुद हार गई

जागरणसंवाददाता,पठानकोट:शहादतकादर्दअसहनीयहोताहैतथाजिसघरकाचिरागराष्ट्रकीबलिवेदीपरकुर्बानहोजाताहै,वोपरिवारजिदालाशबनकररहजाताहै।कुछऐसाहीहुआशौर्यचक्रविजेताशहीदलेफ्टिनेंटगुरदीपसलारियाकीमातातृप्तासलारियाकेसाथ,जिनकाइकलौताबेटालेफ्टिनेंटगुरदीपसलारिया10जनवरी1993कोजम्मू-कश्मीरमेंआतंकियोंसेलड़तेहुएशहादतकाजामपीगयाथा।बेटेकेगममेंमांटूटसीगईऔरउन्हेंकैंसरजैसीघातकबीमारीनेअपनीगिरफ्तमेंलेलिया,मगरइसबहादुरमांमेंइतनीविलपावरथीकिउन्होंनेदोबारकैंसरकोहराया।कुछमहीनेपहलेइसघातकबीमारीनेफिरसेशहीदलेफ्टिनेंटगुरदीपसलारियाकीमांकोअपनीगिरफ्तमेंलेलिया,लेकिनइसबारवेइससेउभरनहींपाईऔरगतदिवसउनकानिधनहोगया।इसतरहएकबहादुरबेटेकीबहादुरमांकानिधन27वर्षतककैंसरसेलड़नेकेबादजिंदगीकीजंगहारगई।

जबलेफ्टिनेंटगुरदीपसलारियाशहीदहुएतोउसवक्तउनकेपिताकर्नलसागरसिंहसलारियाशहीदबेटेकीयूनिट23पंजाबरेजिमेंटमेंबतौरकर्नलड्यूटीनिभारहेथे।बेटेकीशहादतपरउन्होंनेवर्दीमेंहीअपनेशहीदबेटेकीअर्थीकोकंधादेकरअपनासैन्यधर्मनिभायाथातथाआंखोंमेंआंसूनहींआनेदिये।मगरआजपत्नीकेनिधनपरवोबहादुरपिताटूटगया।कर्नलसागरसिंहसलारियानेनमआंखोंसेकहाकिबेटेकीशहादतकेबादउनकीपत्नीनेउन्हेंटूटनेनहींदियाऔरहमेशामेरीताकतबनकरमेरेसाथखड़ीरही।आजउसकेजानेसेमैंपूरीतरहबिखरगयाहूं,मगरफिरभीमैंअपनीजिम्मेदारियोंसेमुंहनहींमोडूंगातथाशहीदपरिवारोंकेअधिकारोंकीलड़ाईशहीदसैनिकपरिवारसुरक्षापरिषदकेसाथमिलकरलड़तारहूंगा।

इसअवसरपरशहीदसैनिकपरिवारसुरक्षापरिषदकेमहासचिवकुंवररविन्द्रसिंहविक्की,राजपूतकल्याणबोर्डपंजाबकेचेयरमैनठाकुरदविन्द्रसिंहदर्शी,शहीदलेफ्टिनेंटत्रिवेणीसिंहअशोकचक्रकेपिताकैप्टनजनमेजसिंह,शहीदसिपाहीमोहनसिंहचिबकेभाईठाकुरजीवनसिंहचिब,शहीदसिपाहीमक्खनसिंहकेपिताहंसराज,ब्रिगेडियरसंजयकांडपाल,कार्पोरेटरचरणजीतसिंहहैप्पी,इंडियनएक्ससर्विसमैनलीगपंजाबचंडीगढ़केउपाध्यक्षकैप्टनफकीरसिंह,सूबेदारमेजरअवतारसैनी,सूबेदारमेजरअंग्रेजसिंह,हवलदारशांतिशर्माआदिनेशहीदलेफ्टिनेंटगुरदीपसलारियाकीमातातृप्तासलारियाकोभावभीनीश्रद्धांजलिअर्पितकी।