सीमा पर शहीद जवानों की यादें रहेंगी जिंदा, पंजाब के जाबांज छाेड़ गए वीरता और हौसले की कहानी

चंडीगढ़,जेएनएन।लद्दाखमेंभारत-चीनबार्डरपरगलवनघाटीमेंचीनीसैनिकोंसेझड़पमेंशहीदहुए20भारतीयसैनिकोंमेंपंजाबकेचाररणबांकुरेभीथे।उनकीशहादतसेपूरापंजाबगमगीनहै,लेकिनउनकेसर्वोच्‍चबलिदानपरगर्वभीहै।इनकेहौसलेऔरवीरताकीकहानीसबकीजुबांपरहैऔरयेकहानियांहमेशाजिंदारहेंगी।कोईसीमापरअपनेदायित्‍वकानिर्वाहकरनेकेलिएसगेभाईकीशादीमेंनहींआयातोकिसीकीबसकुछदिनोंमेंशादीथी।लेकिन,मातृभूमिकीसेवाकाजुनूनऐसाथाकिअपनीखुशियोंकीकोईपरवाहनहींरही।

इनजाबांजोंनेअपनेपरिवारोंसेजल्‍दघरआनेकावादाकियाथा,लेकिनऐसेआएंगेयहकिसीकोपतानहींथा।इनजवानोंकोआजअंतिमविदाईदीजाएगी।उनकेपार्थिवशरीरआजशामतकपहंचनेकीसंभावनाहै।राष्‍ट्रीयध्‍वजमेंइनकेपार्थिवशरीरगमकेसंगसर्वस्‍वबलिदानकाजज्‍बाभीयुवाओंमेंजगाएंगे।जानेंइनवीरोंकेअपनेस्‍वजनोंसेअंतिमसंदेशकीकहानी।

'बार्डरपरपोस्टिंगहोगईहै,फोनमतकरना,मैंखुदकरुंगा'

चीनीसैनिकोंकेसाथहुईझड़पमेंशहीदहुएमानसाकेबोहाकेगुरतेजसिंहने20दिनपहलेफोनकरअपनेमातासेकहाथाकिउसकीपोस्टिंगचीनबार्डरपरहोगईहै।यहांसेफोनकरनासंभवनहींहै।इसलिएफोननहींकरना।मैंखुदफोनकरुंगा।20दिनबीतगएउसकाफोनतोनहींआया,लेकिनउसकीशहादतकीखबरगांवमेंपहुंचगई।

गुरतेजने20दिनपहलेकियाथाघरपरफोन,नहींआपायाभाईकीशादीमें

गुरतेजसिंहकापरिवारअपनेबड़ेबेटेकीशादीकीखुशियांमनारहाथा।तीनदिनपहलेहीबड़ेभाईकीशादीहुईथी।बुधवारसुबहछोटेबेटेकीशहादतकीसूचनामिलीतोघरमेंकोहराममचगया।शहादतकीसूचनासेगांवबीरेवालाडोगरामेंमातमछागया।शहीदगुरतेजकापार्थिवशरीरवीरवारशामकोमानसापहुंचनेकीसंभावनाहै।

23वर्षीयगुरतेजसिंहढाईसालपहलेसेनामेंभर्तीहुएथे।फौजसेरिटायर्डसूबेदारगुरमेजसिंहनेबतायाकिवहकरीबआठमाहपहलेनवंबर2019में10-12दिनकीछुट्टीकेलिएअपनेगांवआयाथा।पिताविरसासिंह,माताप्रकाशकौरहैं।गुरमेजअपनीदादीपालोकौरसेबहुतप्यारकरताथा।उसकेपिताखेतीबाड़ीकरतेहैं।इसपरिवारकेपासमात्रढाईएकड़जमीनहै।बड़ेभाईगुरप्रीतसिंहवत्रिलोकसिंहनिजीक्षेत्रमेंनौकरीकरतेहैं।बीतेसोमवारकोहीउसकेबड़ेभाईगुरप्रीतसिंहकीशादीहुईहै।

परिजनोंकेमुताबिकगुरतेजनेशादीमेंशामिलहोनेकेलिएआवेदनकियाथा।लेकिनसीमापरतनावहोनेसेछुट्टीरद्दहोगईथी।शहीदकेतायामुखत्यारसिंहवचचेरेभाईलवप्रीतनेबतायाकिगुरतेजसिंहबहुतहीहोनहारवदेशभक्तथा।वहकड़ीमेहनतकेचलतेहीकरीबढाईसालपहलेफौजमेंसिखरेंजीमेंटमेंभर्तीहुआथा।जिसकीपहलीपोस्टिंगरामगढ़थी।

बठिंडापोस्टिंगकीथीउम्मीद,अबलौटेगापार्थिवशरीर

अक्सरलोगफौजमेंनौकरीकरतेहुए15से20सालकीसेवाकरतेहैं,लेकिनपटियालाकेशहीदमनदीपसिंहनेअपनेजीवनकेअहम22सालदेशकेनामकरदिए।देशकेलिएजानभीदेदी।पटियालाकेघनौरकेगांवसीलमेंउनकीशहादतपरमातमकेसाथ-साथगर्वभीहैं।हरकोईनायबसूबेदारमनदीपसिंहकीजिंदगी,उसकेजज्बेवसोचकोसलामकररहाहै।महज17सालकीउम्रमेंभर्तीहोनेवालेमनदीपकेदोस्तजोरासिंहनेबतायाकिवेदोनोंसेनामेंएकसाथभर्तीहुए।18सालकीसर्विसकेबादउसनेहवलदारपदपररहतेहुएहीरिटायरमेंटलेहीलेकिनमनदीपनेदेशसेवाकेजज्बेकेकारणड्यूटीजारीरखी।

वहचाहतेतोरिटायरमेंटलेलेते,लेकिनऐसानहींकिया।39वर्षकीउम्रमेंभीबर्फीलीचोटियोंपरवहतैनातरहे।उन्होंनेबतायाकिफुर्सतकेपलोंमेंअकसरमनदीपदेशकेलिएकुछकरगुजरनेकाबातेंकरतेथे।बीती14मार्चकोहीएकमहीनेकीछुट्टीपरआएथे।छुट्टीपूरीहोनेकेबादलॉकडाउनकेकारणढाईमहीनेगांवमेंहीरहा।15दिनपहलेहीड्यूटीपरगएथे।

जोरासिंहनेकहाकिचारसालसेउनकीड्यूटीलद्दाखमेंचलरहीथी।छुट्टियोंकेदौरानमनदीपकहतेथेकिउनकीबटालियनकीपोस्टिंगजल्दहीबठिंडाहोनेवालीहैलेकिनअबउनकापार्थिवशरीरहीगांवपहुंचेगा।शहीदकेपरिवारमेवृद्धमांवतीनबहनोंकेअलावापत्‍नीऔरबेटा-बेटीहैं।मौतकीखबरसुनमांशंकुतलाबेसुधहोगई।बेटेकीशहादतकेबादवहकुछबोलभीनहींपारहीं।

दोदिनपहलेहुईबात,अबखत्मनहींहोगाकॉलआनेकाइंतजार

गुरदासपुरजिलेकेगांवभोजराजकेजांबाजनायबसूबेदारसतनामसिंहकेदेशकेलिएअपनासर्वोच्‍चबलिदानसेगांवमेंगमकेसंगमातमहै।लोगोंमेंचीनकेप्रतिगुस्साहै।बीतेसोमवारकीरातकोसतनामसिंहकीघरपरअंतिमबारबातहुईथी।थोड़ीदेरकीबातचीतमेंसभीकाहालचालपूछाथा।परिवारदोबाराफोनकाइंतजारकररहाहै,जोअबकभीखत्मनहींहोगा।सतनामकेशहीदहोनेकीमाता-पिता,पत्नीऔरबेटीकोनहींदीगईहै।भाईसुखचैनसिंह,बेटेप्रभजोतसिंहऔरचाचाकोहीइसकीजानकारीहै।चाचाकेघरहीलोगशोकव्यक्तकरनेपहुंचरहेथे।

41वर्षीयसतनामतीनमीडियमआरटीयूनिटनिंबूलेहमेंतैनातथे।16मार्चकोदोमहीनेकीछुट्टीकाटकरड्यूटीकेलिएरवानाहुएथे।सतनाम25सालसेदेशकीसेवाकररहेथेऔरचारसालबादसेवानिवृत्तहोनेवालेथे।सतनामपरिवारमेंपत्‍नीजसविंदरकौर,19वर्षीयबेटीमनदीपकौरऔर18वर्षीयबेटाप्रभजोतसिंह हैैं।दोनोंब'चे12वींकीपढ़ाईपूरीकरचुकेहैं।

मुझेदियाजाएभाईकीमौतकाबदलालेनेकामौका

शहीदकेछोटेभाईसूबेदारसुखचैनसिंहभीपांचसिखएयूनिटहैदराबादमेंतैनातहैं।वहछुट्टीपरघरआएहैं।सुखचैनसिंहनेकहाकिभाईकोखोनेकाजख्मकोईनहींभरसकता।उनकीशहादतपरहमेशागर्वरहेगा।अगरहालातऐसेहीबनेरहेतोड्यूटीपरपहुंचतेहीउनकीड्यूटीलद्दाखमेंचीनबार्डरपरलगाईजाए।'मैंचाहूंगामुझेभीचीनसेभाईकीमौतकाबदलालेनेकामौकादियाजाए।'

आठमाहपहलेहुईमंगनी,शादीसेपहलेपियाशहादतकाजाम

'मांजीतुसींफिकरनाकरो,आकेमैंसेहरावींबन्नांगातेघोड़ीवीचड़ांगा।चावांनालतुहाडीनूंहकोलैकेआंवांगे।बस,मैंनूदोबाराआजानदो,फेरघोड़ीचड़ादेणा।' मांचरणजीतकौरसमेतपरिवारकोअपनीमीठीबातोंसेमोहलेनेवालागुरबिंदरशहादतकासेहरापहनदेशकेनामघोड़ीचढ़गया।सुनामकेगांवतोलेवालकारहनेवाला22वर्षीयगुरबिंदरढाईसालपहलेहीसेनामेंभर्तीहुआ।आठमाहपहलेपासकेगांवऊबावालमेंंमंगनीहुई।बहनसुखजीतकौरनेकहाकिवहजिसभाईकेमाथेपरसेहराबांधनेकेसपनेदेखरहीथी,अबउसकीदेहपरकफनदेखनेकीहिम्मतउसमेंनहींहै।वहबिनाबताएहमेंछोड़करचलागया।

गुरबिंदरकीशहादतकेबादमांकीआंखेंपथरागईहैैं।कहा-बेटेकापार्थिवशरीरदेखनेकाकहरवाहेगुरुनेक्योंबरपादिया।पितालाभसिंहनेकहाकिबुढ़ापेकेसमयभगवाननेउनकेनसीबमेंकुछऔरहीलिखदिया।

नहींकीखेती,कहताथाकिकिस्मतमेंकुछऔरहीलिखाहै

भाईगुरप्रीतसिंहनेबतायाकिपरिवारमेंपहलेकोईसेनामेंभर्तीनहींहुआलेकिनबचपनसेहीवहदेशसेवाकरनाचाहताथा।परिवारउसेखेतीकरनेकेलिएकहतातोवहकहताथाकिउसकीकिस्मतमेंतोकुछऔरहीलिखाहै।कुछमहीनेपहलेवहगांवआयाथाऔरअबउसकेविवाहकीतैयारियांचलरहीथीं।सबकुछएकझटकेमेंखत्महोगया।

18दिनपहलेघरपरहुईबात,सर्दीकेकारणनहींसोपाता

गुरप्रीतकेअनुसार18दिनपहलेगुरबिंदरकाफोनआयाथा।वहबतारहाथाकिठंडज्यादाहोनेकेकारणवहआजकलसोनहींपारहा।वहएकचोटीपरतैनातथा,जिसकारणज्यादाबातनहींहोपारहाथी।

(इनपुट-बोहा(मानसा)सेदर्शनहाकमवाला,पटियालासेसंजयवर्मा/गुरदीपकटारिया,गुरदासपुर/कलानौरसेसुनीलथानेवालिया,मंहिंदरसिंहअर्लीभन्नऔरसंगरूरसेमनदीपसिंह।)

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