शहीद क्रांतिकारी बाबू गुलाब सिंह जिनके नाम से प्रतापगढ़ में है एक कस्बा, पढ़िए उनकी वीरता पर यह गाथा

प्रयागराज,जागरणसंवाददाता।आजादीकेअमृतमहोत्सवकेदौरानअवधकेहिस्सेप्रतापगढ़केऐसेदोवीरोंकापराक्रमआपकोरोमांचितकरसकताहै,जिन्होंने1857कीक्रांतिकेदौरानअंग्रेजीसैनिकोंकोमौतकेघाटउतारकरनदीमेंबहादियाथा।अपनेपराक्रमकेजरिएदेशकीआजादीकेलिएनईचेतनाजगाईथीबाबूगुलाबसिंहऔरउनकेभाईमेदिनीसिंहने।दोनोंभाइयोंकेनामपरकस्बेजरूरआबादहैै,लेकिनकिसीकीप्रतिमातकनहींलगीहै,कोईकार्यक्रमभीजन्मतिथिअथवापुण्यतिथिपरनहींहोता।डेढ़सौवर्षोंमेंउनकीयादों,गाथाओंकोसहेजनेकीकोईपहलनहींकीगई।

बकुलाहीनदीकेपासहमलेमेंमारेथेअंग्रेजसैनिक

जिलेकेदक्षिणांचलमेंहैमानधाताकातरौलगांव।यहांकेनिवासीरहेतालुकेदारबाबूगुलाबसिंहनेअपनेभाईमेदनीसिंहऔरछोटीसीसेनाकेसाथक्रांतिकेदौरानइलाहाबाद(अबप्रयागराज)सेलखनऊजारहेअंग्रेजीसैनिकोंपरबकुलाहीनदीकेपासघेरकरहमलाकरदियाथा।दर्जनोंअंग्रेजीसैनिकमारेगएथे।दोनोंभाईइससंघर्षमेंघायलहुएथे।गुलाबसिंहतीसरेदिनवीरगतिकोप्राप्तहोगएऔरउनकेभाईबाबूमेदिनीकुछदिनोंबाद।

जनराजाकेरूपमेंसम्मानितरहेहैंबाबूगुलाबसिंह

बाबूगुलाबसिंहअपनीरियासतकेराजासेकहींअधिकजनराजाकेरूपमेंसम्मानितथे।तरौलसेकरीबतीनकिमीकीदूरीपरबकुलाहीकेकिनारेभयहरणनाथधामहै।यहमहाभारतकालकाप्रसिद्धशिवालयहै।यहांहरदिनबाबूगुलाबसिंहअपनेघोड़ेसेआतेथे।दर्शनकरतेथे।मंदिरकेविकासपरअपनीरियासतसेसहयोगकरतेथे।मंदिरकेआसपासलोगरहें,इसीमकसदसेउन्होंनेअपनेद्वाराहीकटराबसायाथा।इनकेभाईकेनामपरकटरामेदनीगंजआबादहुआ,लेकिनलेकिननईपीढ़ीकोछोडि़एपुरानीपीढ़ीकोभीपराक्रमकीगाथाज्यादानहींपताहै।जिलेकेइतिहासकारडा.पीयूषकांतशर्माबतातेहैंकिगुलाबसिंहकाजनतापरबहुतप्रभावथा।उन्होंनेजबक्रांतिकाबिगुलफूंकातोजनताउसमेंशामिलहोनेकोखुदहीआगेआनेलगी।उसीकेबलपरउनकीसेनाकोशक्तिमिली।आजादीकेअमृतमहोत्सवकेदौरानइनकीदास्तांअक्षुण्णरखनेकीपहलकीजानीचाहिए।

भयहरणनाथधामकेमहासचिवसोशलवर्करडा.समाजशेखरकहतेहैंकिउसदौरकोकौनभूलसकताहैजब1857मेंदेशमेंअंग्रेजोंकेखिलाफसामूहिकविद्रोहकीआगभड़कउठीथी।प्रतापगढ़केकईतालुकेदारऔरराजे-रजवाड़ेअंग्रेजोंकेविरोधकेलिएआगेनहींआए,लेकिनतरौलकेगुलाबसिंहनेअंग्रेजोंकेसामनेघुटनेनहींटेके।उन्होंनेइनकाखुलकरविरोधकिया।कोठीमेंजोसेनाथी,उसकापुनर्गठनकियातोउसमेंतमामग्रामीणलड़ाकूशामिलहोगए।बाबूगुलाबसिंहकीयादोंकोजीवंतरखनेकाप्रयासकरतेहुएभयहरणनाथधाममेंउनकेनामपरअभिलेखागारकीस्थापनाकीगईहै।

पुरातत्वविद्लोकभाषाकविडा.निर्झरप्रतापगढ़ीबतातेहैंकिकटराएकफारसीशब्दहै,जिसकाअर्थहोताहैपुरवा।बाबूगुलाबसिंहकेनामपरकटरागुलाबसिंहबाजारहै।मेदिनीसिंहकेनामपरकटरामेदनीगंजकीस्थापनाहुई,जोबादमेंनगरपंचायतबना।वहांभीइनकाकोईनामलेवानहींहै।नईपीढ़ीतोशायदजानतीभीनहोगीकिकटरामेदनीगंजकिसकेनामपररखागयाहै।पुरानीपीढ़ीकेलोगभीसेअनजानहीहैं।62सालकेरामप्रसादपुष्पाकरसेचर्चाहुईतोवहकहनेलगेकिमेदनीगंजकाक्यामतलबहोताहै,नहींजानते,बसएकबाजारहै।

कोलकातासंग्रहालयतकखोजीक्रांतिकारीकीमूर्ति

महानक्रांतिकारीबाबूगुलाबसिंहकोकोईचित्रयामूर्तिउपलब्धनहींहै।तरौलकेपासढेमागांवकेवरिष्ठशिक्षाविद्विनोदसिंहबतातेहैंकिघोड़ेपरसवारबाबूगुलाबसिंहधड़ाधड़अंग्रेजीसैनिकोंकोमारतेजारहेथे।इसकेबादअंग्रेजसैनिकोंनेघेरकरउनपरभीहमलाकरदिया,जिससेवहलहूलुहानहोगएवउनकाघोड़ालंगड़ाहोगया।इसकेबावजूदवहउसीघोड़ेसेभागेऔरतीनदिनबादवीरगतिकोप्राप्तहुएथे।उनकेभाईमेदिनीसिंहकोअंग्रेजोंकीसेनानेघेरनेकाप्रयासकियातोवहशहरकीओरभागे।उनकोकटराकेपासघेरकरमारदियागया।वहलड़तेहुएवीरगतिकोप्राप्तहुए।देशकीआजादीकेलिएअंग्रेजोंसेलड़जानेवालेबाबूगुलाबसिंहकीअददमूर्तिइसजिलेमेंनहींलगसकी।उनकाकोईस्मारकऔरसमाधिभीआजतकनिर्मितनहींहोपाई।लोगोंकोइसबातकामलालहैकिजिनलोगोंकासंग्राममेंकोईयोगदाननहींरहाउनकीगाथागाईजातीहैऔरअसलीवीरोंकोभुलादियागया।उनकेइतिहासकोदबादियागया।उनकीमूर्तिकीखोजमेंलोगकोलकातासंग्रहालयतकगए,परनहींमिली।

गांवमेंमिटरहेकोठीकेअवशेष

तरौलगांवमेंराजागुलाबसिंहकेपरिवारकाकोईनहींहै।अंग्रेजोंसेयुद्धकेबादहीसबचलेगएथे।कोठीधीरे-धीरेखंडहरहोकरअपनाअस्तित्वखोनेलगी।अबतोइसकेअवशेषभीबहुतकमहैं।नींवकीचंदईंटेंऔरकुछदीवारेंहीनजरआतीहैं।एकपुरानाकुआंभीहै,जोअबउपयोगमेंनहींहै।गांवकेलोगभीइसकेमहत्वकेबारेमेंनहींजानते।इतिहासकेकुछविद्यार्थीकभी-कभारयहांजरूरनजरआजातेहैं।उनकोभीगांववालोंसेगुलाबसिंहकेबारेमेंकोईजानकारीनहींमिलपाती।