पंजाब के दिव्यांग राजिंदर के हौसले के आगे बौनी पड़ी मंजिल, जिंदगी की हर निराशा को ऐसे बदला आशा में

मोगा[राजकुमारराजू]। हौसलेबुलंदहोंतोहरमंजिलबौनीसाबितहोजातीहै,समालसरकेराष्ट्रीयस्तरकेकबड्डीखिलाड़ीरहचुकेराजिंदरसिंहकाहौसलादेखयेकहावतपूरीतरहसचसाबितहोतीहै।नींदमेंचलनेकीबीमारीकेकारणसाल1996मेंछतसेगिरकरराजिंदरगंभीररूपसेघायलहोगएथे,वेठीकतोहोगए,लेकिनदिव्यांगहोगए।इसहादसेनेराजिंदरकीपूरीजिंदगीहीबदलदी,वेकैंसरकीचपेटमेंआगए।

डाक्टरनेराजिंदरसिंहकेपरिजनोंकोबोलदियाकिसातमहीनेमेंमौतहोजाएगी।डाक्टरकीबातसुनराजिंदरसिंहनिराशनहींहुए,मौतकोहरानेकीठानली,बसफिरक्याथाउन्होंनेहरदिनजामुन,अमरूद,केलेके40ग्रामपत्तेखाकरपहलेकैंसरकोमातदेदी।यहीनहीं,उन्होंनेअपनेखेलकोजिंदारखा।दिव्यांगकेरूपमेंबोशियाखेलकोअपनालिया,इसकीप्रैक्टिसकेलिएघरकीछतपरहीपिचतैयारकरलीहै।कोरोनाकेबादवेपैरालंपिकमेंएशियनचैंपियनशिपमेंखेलनेकीतैयारीकररहेहैं।राजिंदरकहतेहैंकिवहएशियनकंपटीशनमेंगोल्डलेकरवापसलौटेंगे।

जिंदगीकीहरनिराशाकोआशामेंबदला

जिंदगीकाअर्धशतकलगानेकीओरबढ़रहे48सालकेराजिंदरसिंह1996तककबड्डीकेजानेमानेखिलाड़ीथे,वेहरजीतबाजाखानाकीओरसेभीखेलचुकेहैं,बेस्टरेडरकाअवार्डकईबारमिलाथा।राजिंदरबतातेहैंकिउन्हेंनींदमेंचलनेकीबीमारीथी,इसीकारण1996मेंरातमेंचलतेहुएवेचौबारेसेनीचेगिरकरगंभीररूपसेघायलहोगएथे।इसकेकारणवह दिव्यांगहोगए।कईमहीनेतकबेडपररहे,इसीदौरानउन्हेंकैंसरकीबीमारीनेघेरलिया।

चिकित्सकनेटेस्टकरानेकेबादपरिवारकेलोगोंकोबोलदियाथाकिवेसातमहीनेसेज्यादाजिंदानहींरहेंगे।राजिंदरसिंहकोजबइसबातकापताचलातोउन्हेंपलभीचिकित्सककीबातसेखौफनहींहुआ,बल्किउसीपलसंकल्पलेलियाकिवेकैंसरकोभीहराएंगेऔरअपनेअंदरकीस्पोर्टसमैनशिपकोजिंदारखेंगे।

दिव्यांगराजिंदरसिंह।जागरण

देसीदवाओंसेकियाखुदकोठीक

डाक्टरतोजबावदेहीचुकेथेतोराजिंदरसिंहनेनिजीस्तरपरकैंसरकाइलाजशुरूकरदिया।देसीदवाएंलीं,पत्तेखाए,कुछमहीनेमेंहीकैंसरकोमातभीदेदी।कैंसरहीनहीं,उसीदौरानशुगरभीहोगईथी,हैपेटाइटिससीभीहोगयाथा,लेकिनदेसीदवाओंसेएक-एककरहरबीमारीकोमौतदेदी,खुदकीस्पोर्ट्समैनशिपकोनईजिंदगीदेदी।राजिंदरसिंहकोलेकरजिसडाक्टरनेसातमहीनेमेंमौतकीभविष्यवाणीकीथी,बादमेंवहभीराजिंदरकीस्थितिकोदेखहैरानगएथे।राजिंदरअबपूरीतरहफिटतोनहीं,दिव्यांगहैं,व्हीलचेयरपरचलतेहैं,खानाभीउन्हेंखिलानापड़ताहै,लेकिनहाथकीएकउंगलीवअंगूठाकामकरताहै,इसीकीबदौलतवेतमामकामअपनेकरलेतेहैं,बोशियाखेलतेहैं।एशियनबोशियाचैंपियनशिपमेंजानेकीतैयारीकररहेहैं।

घरकीछतपरहीतैयारकराईपिच

मध्यमवर्गीयपरिवारसेसंबंधरखनेवालेराजिंदरसिंहबतातेहैंकिबोशियाखेलनाउनकीमजबूरीभीहैक्योंकिमहजदोकिलेजमीनसेवेपरिवारकापेटनहींपालसकतेहैं।खेलसेकुछपैसेअर्जितकरेंगेतोपरिवारकोभीठीकसेपालसकेंगे,बसअबकोरोनाखत्महोनेकाइंतजारहै,ताकिजीवनकीनईपानीशुरूकरसकें।एशियनपैरालंपिकखेलअगलेसालदुबईमेंहोनेकीउम्मीदहै।

राजिंदरसिंहकोप्रमाणपत्रदेकरसम्मानितकरतेखेलकेआयोजक।

बोशियाखेलभीराजिंदरकेलिएएकबड़ीचुनौतीथी,क्योंकिसमालसरजैसेपिछड़ेकस्बेमेंइसखेलकेलिएकोईपिचनहींथी,चंडीगढ़जैसेबड़ेशहरोंमेंतोबोशियाकाफीअच्छेस्तरपरखेलाजाताहै,खेलमैदानभीहैं,ऐसेमेंराजिंदरकीमददउनकेकुछदोस्तोंनेकी।करीब50हजाररुपयेखर्चकरघरकीछतपरहीपिचतैयारकराईहै।वहींअभ्यासशुरूकरदियाहै।राजिंदरमानतेहैंकिउन्हेंबेसब्रीसेइंतजारहैकबवेखेलनेजाएं,ताकिअपनेदोस्तोंसेलियाकर्जाउतारसकें।