पद्मश्री 2022: लखनऊ की डा. विद्या विंदु सिंह को मिला 'विद्या' का सम्मान, जान‍िए क्‍या हैं उपलब्‍ध‍ियां

लखनऊ,[दुर्गाशर्मा]। लोकसंस्कृतिकेविविधरूपोंमेंनिहितभारतीयपरंपराऔरसंस्कारकोडा.विद्याविंदुसिंहशब्ददेकरजन-जनतकपहुंचानेकेलिएनिरंतररचनाशीलहैं।लोकसाहित्यकेअलावाभीउनकीतमामकृतियांहैंजोसमाजकाेकुछसकारात्मकदेतीहैं।उप्रहिंदीसंस्थान,लखनऊमेंसंयुक्तनिदेशकपदसेसेवानिवृत्तडा.विद्याविंदुसिंहहमेशासेमानतीरहींकिहमेंअनुवादकेआधारपरहीनहीं,सादगीऔरसहजतासेपुस्तकोंकालेखनकरनाहोगा।दोजुलाई,1945कोउत्तरप्रदेशकेग्रामजैतपुर,सोनावां,जिलाफैजाबाद(अबअयोध्या)मेंप्राणदेवीऔरदेवनारायणसिंहकीपुत्रीकेरूपजन्मींडा.विद्याविंदुसिंहकोपद्मश्रीलोकसंस्कृतिकीसाधनाकाेसम्मानहै।वहस्वयंभीकहतीहैंकियहउनकानहीं,लोककासम्मानहै।साहित्यकीविभिन्नविधाओंमेंडा.विद्याविंदुसिंहकी115कृतियांप्रकाशितहैं।डा.विद्याविंदुसिंहहमेशासेहीभारतीयसंस्कृति,परंपरा,संस्कारकीपक्षधररहीं।उनकेद्वारागढ़ेगयेचरित्रभारतीयताकीमूलभावनाकाहीचित्रणकरनेवालेहोतेहैं।

डा.विद्याविंदुसिंहउत्तरप्रदेशहिंदीसंस्थानसेएकलंबेसमयतकसम्बद्धरहीहैं।पहलेप्रधानसंपादकफिरउपनिदेशकऔरसेवानिवृत्तिकेसमयसंयुक्तनिदेशकपदकोसुशोभितकरनेवालीडा.विद्याविंदुसिंहसंस्थानद्वाराप्रकाशितपत्रिका'साहित्यभारतीजिसकाप्रारंभिकनाम'भाषाभारतीभीथा,केसंपादककेरूपमेंविशेषरूपसेजानीजातीहैं।डा.विद्याविंदुसिंहकारचनासंसारअत्यन्तविस्तृतहै।उनकासाहित्यशोधार्थियों-विद्यार्थियोंकेलिएभीमहत्त्वपूर्णहै।साहित्यकारडा.अमितादुबेऔरअलकाप्रमोदनेउनपर'अविरलसक्रियसर्जकडा.विद्याविंदुसिंह'शर्षकसेकिताबभीलिखीहै।

कवितासंग्रह: वधूमेध,सचकेपांव,अमरबल्लरी,कांटोंकावन,(हाइकुसंग्रह)वापसलौटेंनीड़,(दोहासंग्रह)पलछिन,(क्षणिकाएं)तुमसेहीकहनाहै(भक्तिगीत),हमपत्थरनहींहुए,हमपेड़नहींबनसकते,फुलवाबरनमनसीता(अवधीकविताएं)

लोकसाहित्य:अवधीलोकगीतएकसमीक्षात्मकअध्ययन,लोकमानस,चन्दनचौक,पीरपराई,सोंठ-गांठ,अवधकीलोककथाएं,‘स्टोरीआफराम,राजाकीपोल,उप्रकीलोककलाएं,घरकीभाषाघरकाभाव,अवधीलोकनृत्यगीत,दिन-दिनपर्व,अवधीकीवाचिकपरंपरा,एकबांसुरीएकबांस,सीतासुरुजवाकज्योति,रामकथाइनअवधीफोकलोरअवधीलोकगीतोंमेंगदर,लोकविमर्शपेटकादुःख(लोककथाएं),नीलकंठ(लोककथाएं)।श्रीहरिनाममहिमा(अध्यात्म-चिंतनपरकनिबंध),ढोलकरानीमोरेनितिउठिआइयू(संस्कारगीत),अवधीलोकसाहित्यमेंप्रकृतिपूजा,अवधीलोकगीतविरासत,अवधीवाचिककथालोकःअभिप्रायचिंतन,साक्षात्कार:संवादपरिक्रमा,नाटक:काकीरोओमत,अपनासबसंसार,चन्द्रावती,तुरन्त,हसनेपरलालरोनेपरमोती,जयबोलोमहात्मागांधीकी।

नवसाक्षरएवंबालसाहित्यःबकुलीऔरकौआ,कुआं,कहानीधनतेरसकी,आंखललाईमूछमलाई,भरपाया,बेटी-बेटे,अन्यायनहींहोनेदूंगी,मालकिननहींमांकहो,कर्ज,वंश,निनियाआवैनिनरवनसे,ईगारीप्रीतिप्यारीजी,सुगनी,प्रीतिकेगीत।तोताऔरआदमी,(कहानियां),आजकागोपाल,गुल्लीडंडारेतमें(बालकविताएं)।

व्याकरण-आइयेव्याकरणसीखेंकक्षाएकसेआठतकहिंदीव्याकरणकीसरलएवंसचित्रपुस्तकें।

संपादनः‘सालभर-पर्व’(डा.विद्यानिवासमिश्रकेचुनेहुएनिबंध),हिंदीकीजनपदीयकविताएं(अवधी)।वाचिककविताअवधी।येदीपसुधियोंके,रामकृपाकरचितवाजाही,(श्रीकृष्णप्रतापसिंहस्मृतिग्रंथ),पीयूषमाला(श्रीविष्णुदेवानन्दविरचितकासंशोधितपरिवर्धितसंकलन)।परिक्रमा(कहानीसंकलन),अंजुरीभरफूल(स्मृतिका-2010),श्रद्धा-विश्वास(स्मृतिका-2011),भाव-तीर्थ(स्मृतिका-2012),सद्भाव(स्मृतिका-2012)संत-विवेक(स्मृतिका-2013),जंगनामा(1857केगदरकीगौरवगाथा(अवधीकासरलकाव्यरूपांतर),युवामानसकेप्रणेतास्वामीविवेकानंदःअभिनवचिन्तन,भारतीयवांङ्मयमेंधर्मऔरसंस्कृति।संतविवेक(2014),अक्षतफूल(स्मारिका2015),संतविवेक2015,संतविवेक2016,इनसेउरिनहमनाहीं(जन्मशतीपर)25दिसम्बर,2016।शतसुमनमाल,25दिसम्बर,2017।समीक्षाकेआलोकमेंडॉ.विद्याविन्दुसिंह(समीक्षाओंपरआधारितपुस्तक)सम्पादक-भावनासिंहएवंविनयकृष्णसिंह‘मानेक’वअन्य2018।प्रकाशक-केकेपब्लिशर,भरतरामरोड,दरियागंज,नईदिल्ली।अवधीकासमृद्धगद्यसाहित्य,प्रकाशनाधीन।