मन करता है.. फिर सीमा पर लड़ने जाऊं

राहुलश्याम,धामपुर:कहतेहैंफौजीकभीमनसेरिटायरनहींहोताऔरनाहीबूढ़ाहोताहै।मरतेदमतकवहदेशकीसेवाकरनेकोआतुररहताहै।कुछऐसाहीजज्बाधामपुरक्षेत्रकेनिवासीवयोवृद्धफौजीबलवंतसिंहऔरलोकमनसिंहमेंआजभीकायमहै।उम्रकेइसपड़ावमेंभीवेदेशसेवाकेजुनूनसेसराबोरहैं।

क्षेत्रकेगांवअमखेड़ानिवासीबलवंतसिंह85सालऔरनसीरदीवालाकेलोकमनसिंह86सालपारकरचुकेहैं,लेकिनउम्रकेइसपड़ावमेंभीयेआजभीदेशभक्तिकेउसीजुनूनसेभरेहैं,जोयुवावस्थामेंथा।आजभीदेशसेवाकेअपनेसमयकोयादकरतेहुएदोनोंकहतेहैंकिमनकरताहैकिफिरसेएकबारसीमापरपहुंचकरदेशसेवाकरेंऔरदेशकेदुश्मनोंसेदो-दोहाथकरें।नायकबलवंतसिंहवलांसनायकलोकमनसिंहभारत-चीनयुद्धमेंदुश्मनोंसेलोहालेचुकेहैं,वर्ष1962मेंअरुणाचलप्रदेशकेतवांगमेंतैनातयहदोनोंफौजीयुद्धमेंफ्रंटइन्फेंट्रीमेंथे।दोनोंपैदलटुकड़ीमेंरहकरचीनीसैनिकोंसेआमने-सामनेकीलड़ाईमेंछक्केछुड़ाचुकेहैं।छहमाहबादहीमिलगयादेशसेवाकामौका

बलवंतसिंहअपनीपुरानीस्मृतियांताजाकरतेहुएबतातेहैंकिवेवर्ष1962मेंहीसेनामेंभर्तीहुएथे।छहमाहकीसर्विसकेबादहीभारत-चीनयुद्धछिड़गयाऔरउनकीयूनिटकोसीमापरजानेकाफरमानसुनायागया।वेस्वयंकोभाग्यशालीबतातेहुएकहतेहैंकिउन्हेंनियुक्तिकेछहमाहबादहीदेशकेलिएलड़नेकामौकामिला।वेबतातेहैंकिउससमयपैदलसैनिकोंकोबहुतअधिकसुविधाएंऔरआधुनिकहथियारमुहैयानहींहोतेथे,उनकीटुकड़ीनेजी-जानलगाकरचीनीसैनिकोंकोमुंहतोड़जवाबदिया।वहीं,लोकमनसिंहनेबतायाकिवेवर्ष1961मेंभर्तीहुएथे,उन्हेंकरीबएकसालबादजंगमेंजानेकामौकामिला।दोनोंफौजीकहतेहैंकिवेफौजीभाग्यशालीहोतेहैंजिन्हेंदेशकेलिएयुद्धमेंहिस्सालेनेकासौभाग्यमिलताहै,यहहरकिसीकोप्राप्तनहींहोताहै।इसउम्रमेंभीयुवाओंकोकररहेप्रेरित

उम्रकेइसपड़ावमेंआजभीदोनोंकाजज्बाकमनहींहुआहै।क्षेत्रकेयुवाओंमेंदेशभक्तिकीअलखजगारहेहैंऔरउन्हेंसेनामेंजानेकेलिएप्रेरितकरतेहैं।साथहीफिजिकलतैयारीकेलिएभीमार्गदर्शनकरतेहैं।इसकेअलावाकारगिलयुद्धकेदौरानकोरआफइंजीनियरिगमेंअपनीसेवाएंदेचुकेपूर्वसैनिकटीकमसिंहभीधामपुरकेफूलबागकालोनीकेनिवासीहैं।इन्होंनेबलवंतसिंहऔरलोकमनसिंहकेमार्गदर्शनमेंपूर्वसैनिककल्याणसमितिकागठनकियाहै,जिसमेंक्षेत्रके200सेअधिकपूर्वसैनिकोंकोएकमंचपरलानेकाकार्यकियाहै।