कांग्रेस को सर्जरी की जरूरत, बैंड- एड चिपकाने से क्या होगा, भ्रम में जी रही पार्टी

नईदिल्ली:यूपी,उत्तराखंड,पंजाबसमेतपांचराज्योंमेंहुएविधानसभाचुनावोंमेंमिलीहारकेबादकांग्रेसकार्यसमितिकीरविवारकोबैठकहुई।बैठकमेंलिएगएफैसलेकुछलोगोंकोउम्मीदकीकिरणतोदेसकतेहैं,लेकिनइसलेखककोनहीं।एकगणतंत्रकेरूपमेंभारतसेलगभगदोगुनेपुरानेराजनीतिकदलकाएकमृत्युलेखलिखनामूर्खतापूर्णहोसकताहै,लेकिनजबइलाजकेलिएसर्जरीकीआवश्यकताहोतीहै,तोबैंड-एडमददनहींकरेगी।सेंटरफॉरपॉलिसीरिसर्चकेफेलोराहुलवर्मानेकांग्रेसकीमौजूदास्थितिऔरउसकेभ्रमकोलेकरटाइम्सऑफइंडियामेंएकलेखलिखाहै।इसमेंउनकाकहनाहैकिलोकतंत्रमेंचुनावीउलटफेरतोहोतेरहतेहैलेकिनकांग्रेसकमसेकमतीनदशकोंसेसंगठनात्मकगिरावटदिखरहीहै।पार्टीकानेतृत्वअभीतकअपनेसंगठनकेपतनऔरवैचारिकसंकटकीगहराईकोपूरीतरहसेसमझनहींपायाहै।कांग्रेसनकेवलआमराजनीतिकोछोड़चुकीहै,बल्किवहएकझूठीनैतिकजमीनपरहै।कागजोंपरपार्टीकीचुनावीताकतजोभीहोलेकिनवास्तवमेंवहतेजीसेहाशिएपरजारहीहै।इसीतरहकेउदाहरणहैंकिकैसेग्रेटब्रिटेनमेंलेबरपार्टी,जापानमेंएलडीपी,कनाडामेंलिबरलपार्टी,अन्यकेबीच,इसतरहकेसंकटसेफिरसेउबरीहै।लेकिनहालहीमेंकईकांग्रेसनेताओंकीतरफसेबयानबाजीकेबावजूद,यहसंभावनानहींदिखरहीहैकिनिकटभविष्यमेंकोईबड़ीटूटहोगी।1969या1978कीतर्जपरराष्ट्रीयटूटकीसंभावनाबहुतकमहै।इसकीवजहहैकिमौजूदासमयमेंबहुतकमनेताहैंजोमतदाताओंकोलामबंदकरसकतेहैं।जबपरिवारहीपार्टीबनजाएदूसराकारणयहहैकिकांग्रेसकेलिएगांधीकेबादकेभविष्यकीकल्पनाकरनाबेहदमुश्किलहै।पार्टीपिछलेकुछदशकोंसेएकऐसेबुलबुलेमेंजीरहीहैजिसनेSWOT(ताकत,कमजोरी,अवसरऔरखतरा)विश्लेषणकरनेकीउसकीक्षमतामेंबाधाउत्पन्नकीहै।इसप्रकार,यहमहत्वपूर्णक्षणोंमेंअपनीवैचारिकशब्दावली,संगठनात्मकसंरचनाऔरनेतृत्वकीस्थितिमेंजरूरीबदलावनहींकरसकीहै।यहसचहैकिअधिकांशराजनीतिकदलएकनैतिकविशिष्टतातैयारकरनाचाहतेहैंजोपक्षपातपूर्णपहचानयाराजनीतिकवफादारीसेचलतीहो।अक्सर,वेकुछमेटा-नैरेटिवकाप्रचारकरकेऐसाकरतेहैंजोपार्टीकीआवश्यकप्रकृतियाउद्देश्यकोसामनेरखतेहैं।मेटा-नैरेटिवअक्सरतथ्यात्मकघटनाओंमेंनिहितहोतीहै,लेकिनयहधीरे-धीरेनिहितस्वार्थोंमेंबदलजातीहै।हालांकि,एकसमयऐसाआताहैजबउनमिथकोंकाफायदाकमहोनेलगताहै।ठीकयहीकांग्रेसकेसाथहुआहै-इसमिथकनेअबपार्टीऔरपरिवारकेबीचकोईअंतरहीनहींछोड़ाहै।मजबूतमिथककाघटताफायदापहलामिथकहैकांग्रेसकोऐतिहासिकसंदर्भमेंरखनाकिकांग्रेसहीअकेलीपार्टीहैजिसनेस्वतंत्रतासंग्रामकानेतृत्वकियायाआधुनिकभारतकानिर्माणकिया।यहचुनावीलोकतंत्रकापर्यायबनगयाहै।यहमानताहैकिकेवलकांग्रेसहीसभीवर्गों-क्षेत्र,धर्म,जातिऔरवर्गकाप्रतिनिधित्वकरसकतीहै।दलित,ओबीसीयामुस्लिमसीएमकीनियुक्तिमेंकांग्रेसकेखराबरिकॉर्डकेबावजूदयहमिथककांग्रेसकीलोककथाओंकाहिस्साबनाहुआहै।संघवादयागरीबीकमकरनेकीक्षमतापरपार्टीकारिकॉर्डभीअसाधारणनहींहै।दूसरामिथकयहहैकिकांग्रेसनेअकेले"राष्ट्रीयएकता"और"राष्ट्रीयहित"केलिएबलिदानदियाहै।इंदिराऔरराजीवगांधीकीदुखदमौत,या2004मेंसोनियागांधीकापीएमनहींबनना।पार्टीकासाधारणकार्यकर्ताभीइसविचारकोवैधबनानेकेलिएइनकाउदाहरणदेताहै।तीसरामिथकयहहैकिकेवलकांग्रेसऔरगांधीपरिवारहीगरीबोंकेबारेमें,उनकेकल्याणकेबारेमेंऔरउन्हेंसामंतीऔरपूंजीवादीवर्गोंसेबचानेकेबारेमेंसोचतेहैं।जबकिकांग्रेससरकारद्वाराचलाईगईकईकल्याणकारीयोजनाओंकीजड़ेंअधिकार-आधारितदृष्टिकोणोंमेंनिहितथीं।पार्टीनेतृत्वकभीभीमाई-बापसरकारकेअभिनयसेनहींकतराताहै।आर्थिकऔरसामंतीअभिजातवर्गकेसाथकांग्रेसकेसंबंधकेबारेमेंजितनाकमकहाजाएउतनाहीअच्छाहै।चौथामिथकयहहैकिकांग्रेसअपनेवैचारिकविश्वदृष्टिकीतुलना'भारतकेविचार'सेकरतीहै।पार्टीकामाननाहैकिकिसीभीअन्यवैचारिकस्थिति-हिंदूदक्षिणपंथी,समाजवादी,कम्युनिस्ट,अम्बेडकरवादी,अन्यकेबीचसीमितआवाजहै।येअन्यविचारकुछस्थानोंपरकुछसमयकेलिएकर्षणप्राप्तकरसकतेहैं,लेकिनकांग्रेसमंचवहहैजिसकीभारतकोवास्तवमेंआवश्यकताहै।पांचवेंमिथकमेंभारतकीडिफॉल्टगवर्निंगपार्टीहोनेकाभ्रमशामिलहै।इंदिरागांधीकोदोबारकांग्रेस(1969और1978)सेबाहरनिकलनेकेलिएमजबूरकियागयाथा।इसकेबादकेचुनावोंमेंमिलीउनकीसफलतानेसाबितकियाकिकांग्रेसगांधीपरिवारकेबिनाभविष्यकीकल्पनाकरनेमेंविफलक्योंहै।अतीतमेंफंसाभविष्यपार्टी,1996और2004केबीचराष्ट्रीयस्तरपरसत्तासेबाहरहोनेकेबाद,सोनियागांधीकेनेतृत्वमेंलौटी।हालांकिपार्टीआसानीसेइसतथ्यकोनजरअंदाजकरदेतीहैकिराज्योंमेंउसकापतनजारीहै।भारतकेकईमहत्वपूर्णराज्योंमें,कांग्रेसतीनदशकोंसेअधिकसमयसेसत्तामेंनहींहै।पार्टीकोयहसमझमेंनहींआरहाहैकिकांग्रेसकीपुरानीकहानियोंकेइनबातोंमेंसेकुछका1969सेपहलेया1978सेपहलेकाकांग्रेससेसंबंधरहाहोगा,लेकिनअभीनहीं।नईकांग्रेसअबअपनेपुरानेस्वरूपकीघटियाप्रतिरूपहै।कांग्रेसकेलिएभविष्यक्यादर्शाताहै?योगेंद्रयादवकेशब्दोंमेंकांग्रेसकोएकराजनीतिकदलकेरूपमें,एकप्रतीकात्मकस्थानकेरूपमें,औरएकऐसीअवधारणाकेरूपमेंउपयोगकरनेकेलिएजोभाजपाकीराजनीतिकपरियोजनाकेलिएएककाउंटरवेटहै।एकपार्टीकेरूपमेंकांग्रेसएकधीमीमौतमररहीहै,एकप्रतीकात्मकस्थानकेरूपमेंयहअबबड़ीताकतकाप्रतिनिधित्वनहींकरतीहै।एकअवधारणाकेरूपमेंकांग्रेसकोएकभव्यभ्रममेंबदलदियागयाहै।