देश के विकास से मिली विश्व में नई पहचान

लोगो-जागरणके75वर्ष

-साहित्यकारप्रो.अछरु¨सह

प्रदीपशाही,फतेहगढ़साहिब

साहित्यकारप्रो.अछरु¨सहकहतेहैंकियहसत्यहैकिआजादीकेबाददेशमेंहुएविकासनेविश्वमेंनईपहचानस्थापितकीहै।इसकाअंदाजाइसबातसेहीलगायाजासकताहैकिआजादीकेदेशकेविभाजनमेंभारतऔरपाकिस्तानदोभागहुए।मगरविकासमेंभारतनेनईपरिभाषाएंलिखीहैं,जोउल्लेखनीयरहीहैं।

प्रोफेसरकामाननाहैकिसमाजविकासमेंकुछअच्छेपहलूखुशीप्रदानकरतेहैं।वहींपाश्चात्यसभ्यताकेआगमनसेकुछविकारभीपैदाहुएहैं,जोविचारोंकोभ्रमितकररहेहैं।राजनैतिकदलोंकोअपनेभेदभावछोड़करसंयुक्तरूपसेदेशकेविकासकीसोचअपनानीचाहिए।समाचारपत्रसमाजविकासमेंअपनाअहमरोलअदाकररहेहैं।परंतुउन्हेंबिनाकिसीराजनैतिकदबावकेअपनाकामकरनाहोगा।अखबारकोहरवर्गकीसमस्याओंकोउठाकरउनकासमाधानकरवानेकीकोशिशजारीरखनीहोगी।दैनिकजागरणनेपंजाबीजागरणशुरुकरहमारीमांबोलीकेविकासमेंपहलकीहै।

युवाओंकोअपनीशक्तिपहचाननीहोगी:सोनी

जागरणसंवाददाता,फतेहगढ़साहिब

युवाव्यापारीसजनसोनीकाकहनाहैकियुवाओंकोयुवाशक्तिकोपहचाननाहोगा।हमारायुवाअपनेभविष्यकेप्रति¨चतितहै।हमारायुवाशिक्षितहै,परंतुएकलक्ष्यकासहीढंगसेनिर्धारणनकरनेकेकारणशीघ्रहीविचलितहोजाताहै।युवाओंकेविचलितहोनेकीस्थितिकाकुछअसामाजिकतत्वलाभउठारहेहैं।

सोनीकामाननाहैकिहमारायुवाविदेशजानेकेलिएललायितहै।हमयदिसहीढंगसेकामकरें,तोविदेशजानेकीजरूरतहीनहींहोगी।जबअन्यप्रांतोंकेलोगपंजाबआकरअपनाबेहतरढंगसेलालनपोषणकरसकतेहैं।तोहमअपनेदेशकोछोड़करविदेशमेंजाकरक्योंकामकरें।पंजाबकेलोगोंमेंकामकरनेकीक्षमताहै।केवलउसक्षमताकासहीढंगसेउपयोगकरनेकीजरूरतहै।मीडियाकोअपनाकामनिष्पक्षहोकरनाहोगा।आजकुछचैनलकेवलसरकारकोबोलीबोलतेहैं।इससेमीडियापरविश्वासकमहोरहाहै।

एकलपरिवारोंकाजन्मघातक:रत्न¨सह

पावरकॉमसेबतौरलाइनमैनसेवानिवृत्तरत्न¨सहबाजवाकहतेहैंकिसंयुक्तपरिवारोंकेस्थानएकलपरिवारोंकेचलनसेहमारेयुवासंस्कारविहीनहोरहेहैं।संयुक्तपरिवारोंमेंबच्चोंकोदादा-दादी,चाचा-तायाकाप्यारमिलताथा।साथहीसंस्कारभीमिलतेथे।परंतुसमयकेबदलावसेएकलपरिवारोंकेबढ़नेसेयुवावर्गअपनेबुजुर्गोंसेमिलनेवालेसंस्कारवप्यारसेवंचितहोगयाहै।जोदुखदहै।बाजवाकामाननाहैकिएकलपरिवारोंकेकारणसमाजमेंसंस्कारोंकीकमीआरहीहै।पतिपत्नीदोनोंकेनौकरीकरनेकेकारणबच्चेनौकरोंकेहाथोंमेंपलरहेहैं।ऐसेमेंबच्चोंमेंसंस्कारोंकोहोनाकोरीकल्पनाबनरहाहै।एकजमानाथाजबएकपिताअपनेचार-पांचबच्चोंवालेपरिवारकोपालरहाथा।परंतुआजएकबच्चाअपनेमाता-पिताकोसाथरखनेसेभीगुरेजकररहाहै।हमेंसहीसोचअपनाकरएकस्वस्थभारतकानिर्माणकरनेमेंपहलकरनीहोगी।

युवाओंकेलिएनौकरीकाव्यवस्थाकरेसरकार:द¨वदर

छात्रद¨वदर¨सहकहतेहैंकिहमारायुवावर्गपहलेसेअधिकशिक्षितहोरहाहै।परंतुउसकेलिएरोजगारकेअवसरसहीढंगसेपैदानहींहोरहेहैं।यदिदेशमेंहीनौकरीकेसहीअवसरपैदाहोजाएं।तोहमारायुवाजोगलतरास्तेपरजारहाहै।उसेबचायाजासकताहै।मेरामाननाहैकिहमेंशिक्षाकेसिस्टममेंबदलावलानाहोगा।हमेंछात्रकीसोचअनुसारउसेसंबंधितकामकीट्रे¨नगप्रदानकरनीचाहिए।हमेंअपनेबुजुर्गोंकासम्मानकरनाचाहिए।सम्मानकीकमीकेकारणहीआजवृद्धाश्रमकानिर्माणकियाजारहाहै,जोदेशकीपरंपराकेअनुकूलनहींहै।हमेंइससोचकोबदलनाहोगा।हमारेबुजुर्गहमेंसहीदिशादिखानेमेंसक्षमहैं।हमेंउनसेमिलनेवालेज्ञानकालाभउठाकरअपनाभविष्यबदलनाचाहिए।अखबारोंकोइसदिशामेंअपनायोगदानदेकरबुजुर्गोंकोमिलनेवालेसम्मानकोबढ़ानेकीपहलकरनीचाहिए।

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