चार साहिबजादों के शहीदी दिवस पर लंगर लगाया

संवादसहयोगी,बरनाला:श्रीगुरुगोबिदसिंहजीकेचारसाहिबजादोंकेशहीदीदिवसकोसिखसंगतनेश्रद्धासेमनायाजारहाहै।वहींशहीदीदिवसकोलेकरश्रीअखंडपाठआयोजितकिएजारहेहै,ताकिनईपीढ़ीकोशहीदीदिवसकामहत्वबतायाजासके।इसअवसरपरसैकड़ोकीसंख्यामेंसिखसंगतउपस्थितहुए।वहींशहरमेंअलगअलगजगहपरराहगीरोंकेलिएलंगरलगायागया।बरनालामेंगुरुद्वाराकलगीधरसाहिबबरनालाकेसरदारीफारएवरक्लब,भाईजीतासिंहमार्केट,सदरबाजार,रिक्शायूनियनद्वारासंगतकेलिएअटूटलंगरचलायागया।जिसमेंसैकड़ोराहगीरोंद्वाराप्रसादलियागया।इसीप्रकारगुरुद्वारागुरुनानकपूरासाहिबअग्रसेनचौकबरनालामेंश्रीसुखमनीसाहिबजीकेपाठआयोजितकिएगएवश्रद्धालुओंकेलिएलंगरचलायागया।

उधरफतेहगढ़साहिबमेंश्रीगुरुगोबिदसिंहजीकेछोटेसाहिबजादोंबाबाजोरावरसिंह,बाबाफतेहसिंहऔरमातागुजरीकीमहानशहादतकोसमर्पित316वींशहीदीसभारविवारकोवैरागमयनगरकीर्तनसेसंपन्नहोगई।नगरकीर्तनरविवारसुबहनौबजेगुरुद्वाराश्रीफतेहगढ़साहिबसेआरंभहुआ।इससेपहलेमूलमंत्रकापाठकियागयाऔरअरदासहेडग्रंथीभाईहरपालसिंहनेकी।इसकेबादश्रीगुरुग्रंथसाहिबकेपावनस्वरूपकोफूलोंसेसजीपालकीसाहिबमेंसुशोभितकियागया।नगरकीर्तनकेआगेगुरुकीलाडलीफौजेंनिहंगसिंह,विभिन्नस्कूलोंकेबच्चे,धार्मिकसंस्थाओंकेअलावाराजनीतिकपार्टियोंकेनेतासतनामवाहेगुरुकाजापकरतेहुएचलरहेथे।लाखोंकीतादादमेंसंगतभीनगरकीर्तनकेदर्शनपानेकेलिएसड़कोंपरउमड़ी।महाननगरकीर्तनबाददोपहरकरीबदोबजेगुरुद्वाराश्रीज्योतिस्वरूपसाहिबमेंसंपन्नहुआ।वहांश्रीअखंडपाठसाहिबकीअरदासतख्तश्रीकेसगढ़साहिबकेजत्थेदारज्ञानीरघुवीरसिंहनेकी।हुक्मनामाश्रीदरबारसाहिबअमृतसरकेहेडग्रंथीभाईजगतारसिंहनेपढ़ा।

फतेहगढ़साहिब:श्रीगुरुगोबिदसिंहजीकेछोटेसाहिबजादोंबाबाजोरावरसिंह,बाबाफतेहसिंहऔरमातागुजरीकीमहानशहादतकोसमर्पित316वींशहीदीसभारविवारकोवैरागमयनगरकीर्तनसेसंपन्नहोगई।नगरकीर्तनरविवारसुबहनौबजेगुरुद्वाराश्रीफतेहगढ़साहिबसेआरंभहुआ।इससेपहलेमूलमंत्रकापाठकियागयाऔरअरदासहेडग्रंथीभाईहरपालसिंहनेकी।इसकेबादश्रीगुरुग्रंथसाहिबकेपावनस्वरूपकोफूलोंसेसजीपालकीसाहिबमेंसुशोभितकियागया।नगरकीर्तनकेआगेगुरुकीलाडलीफौजेंनिहंगसिंह,विभिन्नस्कूलोंकेबच्चे,धार्मिकसंस्थाओंकेअलावाराजनीतिकपार्टियोंकेनेतासतनामवाहेगुरुकाजापकरतेहुएचलरहेथे।लाखोंकीतादादमेंसंगतभीनगरकीर्तनकेदर्शनपानेकेलिएसड़कोंपरउमड़ी।महाननगरकीर्तनबाददोपहरकरीबदोबजेगुरुद्वाराश्रीज्योतिस्वरूपसाहिबमेंसंपन्नहुआ।वहांश्रीअखंडपाठसाहिबकीअरदासतख्तश्रीकेसगढ़साहिबकेजत्थेदारज्ञानीरघुवीरसिंहनेकी।हुक्मनामाश्रीदरबारसाहिबअमृतसरकेहेडग्रंथीभाईजगतारसिंहनेपढ़ा।

फतेहगढ़साहिब:श्रीगुरुगोबिदसिंहजीकेछोटेसाहिबजादोंबाबाजोरावरसिंह,बाबाफतेहसिंहऔरमातागुजरीकीमहानशहादतकोसमर्पित316वींशहीदीसभारविवारकोवैरागमयनगरकीर्तनसेसंपन्नहोगई।नगरकीर्तनरविवारसुबहनौबजेगुरुद्वाराश्रीफतेहगढ़साहिबसेआरंभहुआ।इससेपहलेमूलमंत्रकापाठकियागयाऔरअरदासहेडग्रंथीभाईहरपालसिंहनेकी।इसकेबादश्रीगुरुग्रंथसाहिबकेपावनस्वरूपकोफूलोंसेसजीपालकीसाहिबमेंसुशोभितकियागया।नगरकीर्तनकेआगेगुरुकीलाडलीफौजेंनिहंगसिंह,विभिन्नस्कूलोंकेबच्चे,धार्मिकसंस्थाओंकेअलावाराजनीतिकपार्टियोंकेनेतासतनामवाहेगुरुकाजापकरतेहुएचलरहेथे।लाखोंकीतादादमेंसंगतभीनगरकीर्तनकेदर्शनपानेकेलिएसड़कोंपरउमड़ी।महाननगरकीर्तनबाददोपहरकरीबदोबजेगुरुद्वाराश्रीज्योतिस्वरूपसाहिबमेंसंपन्नहुआ।वहांश्रीअखंडपाठसाहिबकीअरदासतख्तश्रीकेसगढ़साहिबकेजत्थेदारज्ञानीरघुवीरसिंहनेकी।हुक्मनामाश्रीदरबारसाहिबअमृतसरकेहेडग्रंथीभाईजगतारसिंहनेपढ़ा।