भारतीय समाज का जीवंत दस्तावेज है राजकमल की रचनाएं

सहरसा:शहरकेरमेशझामहिलामहाविद्यालयमेंपहलीबारजेएनयूनईदिल्लीकेव्याख्याताडॉ.देवशंकरनवीनकाएकलव्याख्यानआयोजितकियागया।व्याख्यानकाविषयथा-राजकमलचौधरीकारचनासंघर्ष।कार्यक्रमकीअध्यक्षतामहाविद्यालयकीप्राचार्यडॉ.रेणुसिंहनेऔरसंचालनडॉ.केएमठाकुरनेकी।मुख्यवक्ताडॉ.देवशंकरनवीननेमैथिली-हिन्दीकेसुविख्यातरचनाकारराजकमलकेव्यक्तित्ववकृतित्वपरविस्तारपूर्वकप्रकाशडाला।कहाकिराजकमलनेअपने20वर्षोंकेअल्पकालिकलेखकीयजीवनमेडेढ़सौकहानियों,लगभग200कविताओं,लेखों,निबंधोंकोलिखा।इन्होंनेचारभाषाओंमैथिली,हिन्दी,बांग्लाऔरअंग्रेजीमेंअपनीसाहित्यिकरचनाकी।लेकिनसाहित्यकेआलोचकोंनेराजकमलकोसार्थकमहत्वनहींदिया।मुंशीप्रेमचंदकेबादपत्रिकाओंमेंसर्वाधिकविशेषांकराजकमलपरहीनिकला।लेकिनसाहित्यिकपुरोधाओंनेइन्हेंजीतेजीकिवदंतियोंकानायकहीसमझा।कहाकिपिछले37वर्षोंकेअथकपरिश्रमसेराजकमलकीसमस्तरचनाओंकोएकत्रकर4000पृष्ठोंमेंइनकीरचनावलीप्रकाशितकीगईहै।डॉ.नवीननेकहाकिआधुनिकहिन्दी-मैथिलीसाहित्यमेंराजकमलकाहस्तक्षेपअविस्मरणीयहै।आजकेपाठकोंकेलिएराजकमलअत्यधिकआवश्यकरचनाकारहैंजिन्हेंपढ़नाऔरजाननाजरूरीहै।राजकमलकारचनाजगतअपनेआपमेंभारतीयसमाजकाएकऐसाजीवितदस्तावेजहैजिसमेंउनकेसमयकासारासमाजस्पष्टपरिलक्षितहोताहै।इसदौरानडॉ.शारदामिश्र,डॉ.अंजनापाठक,डॉ.रीतासिन्हा,डॉ.आरकेमलिक,डॉ.एकेठाकुर,डॉ.संजयकुमारमिश्र,डॉ.सूर्यमणिकुमार,डॉ.अभयकुमार,डॉ.अनिलकुमार,डॉ.प्रीतिगुप्ता,डॉ.रीनासिंह,डॉ.नरेशकुमारसिंह,राणासुनीलकुमारसिंह,डॉ.बालगोविदसिंह,एनकेपाण्डेय,जयकृष्णप्रसाद,संजीतकुमारसिंह,मृगेन्द्रझा,सौरभदिवाकर,देववंशसिंह,रामकुमारसिंह,शैलेन्द्रशैली,किसलयकृष्णआदिमौजूदथे।