अमलोह के गांव भांबरी के तीन दोस्त यूक्रेन में फंसे, सात महीने पहले गए थे पढ़ाई के लिए यूक्रेन

इकबालदीपसंधू,मंडीगोबिदगढ़:रूस-यूक्रेनयुद्धकासबसेबुराअसरभारतीयोंकोभुगतनापड़रहाहैक्योंकिउनकेबच्चेमेडिकलकीपढ़ाईकेलिएगएहुएथेऔरउनकीसकुशलवापसीकेलिएवोलगातारदुआएंकररहेहैं।लेकिनउनकीपरेशानीकमहोनेकानामनहींलेरही।पंजाबकेविभिन्नइलाकोंकेसाथहलकाअमलोहकेगांवभांबरीकेतीनयुवकयूक्रेनमेंरूसयुद्धमेंफंसगएहैंउनकेपारिवारिकसदस्यआजचितामेंहैंकिउनकेघरोंकेचिरागसहीसलामतपहुंचजाएं।पारिवारिकसदस्योंनेबतायाकिजश्नदीपसिंह,अजीतसिंह,गुरविदरसिंहतीनोंदोस्तकरीब7महीनेपहलेयूक्रेनगएथेऔरलुटावामेंलैंग्वेजकीपढ़ाईकेलिएगएथे।जसनप्रीतकेपिताहरिदरसिंहनेबतायाकिइसयुद्धकेकारणहालातकाफीखराबहोगए।क्योंकिहमारेबच्चेवहांकाफीबुरेहालातकासमानाकरनापड़रहाहै।जोवीडियोमिलरहीहैउन्हेंदेखकरमनदुखीहोरहाहैकिउनकीयूक्रेनमेंअभीतककोईमददनहींहोरहीजबकिपैसेभीभेजेलेकिनदिनबदिनहालातदेखकरउनकाबुराहालहै।