आर्य समाज का वार्षिकोत्सव, वैदिक संस्कृति से लौटेगा पुराना वैभव

संसू,भोगांव:आर्यविचारोंकेमाध्यमसेहीसमाजमेंबदलावलायाजासकताहै।महर्षिदयानंदकेज्ञानकोआत्मसातकरव्यक्तिजीवनमेंसारीबाधाओंसेपारपाकरउन्नतिकामार्गप्रशस्तकरनेमेंअग्रसरहोगा।

येबातहरियाणाकेकरनालकीआर्यविद्वानअंजलीआर्यनेतहसीलक्षेत्रकेगांवबरीहारमेंआर्यसमाजकेवार्षिकोत्सवकार्यक्रममेंकहीं।उन्होंनेकहाकिवैदिकसंस्कृतिऔरआर्यविचारअनमोलधरोहरहैं।वेदोंकीमहिमाकाबखानकरनेवालेआर्यसमाजकेमाध्यमसेहीसमाजमेंक्रांतिऔरपरिवर्तनसंभवहै।भारतदेशकेपुरानेवैभवकोवापसलानेकेलिएगुरुकुलशिक्षापरजोरदेतेहुएउन्होंनेवर्तमानपीढ़ीकोसंस्कारवानबनानेकाकहा।आर्यविद्वाननेकहाकिवेदसभीधर्मोकामूलहैंऔरवेदोंकाज्ञानहीसंस्कृतिकेमूल्योंकीरक्षाकरसकताहै।आर्यसमाजकेसंस्थापकमहर्षिदयानंदकेविचारोंसेप्रेरणालेकरसमाजसुधारकाकामकरनाचाहिए।प्रात:ब्रहमयज्ञमेंआहुतियांदीगई।इसदौरानकार्यक्रमसंयोजकबांकेलालआर्य,रामप्रसाद,रामसनेहीलाल,श्रीपालआर्य,विष्णुमित्र,बलवीरसिंहआर्य,धर्मेंद्रआर्य,परमानंद,ताराचंद्रआर्य,सत्यवीरसिंह,चंद्रप्रकाशयादव,रघुनंदनसिंह,संतोषद्विवेदी,सुभाषचंद्रआर्य,कश्मीरसिंह,वेदप्रकाशआदिमौजूदरहे।कार्यक्रमकासमापनगुरुवारकोदोपहरमेंहोगा।